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सरकार के एक फैसले से झूमे Sugar Stocks! क्या Ethanol Theme में शुरू होने वाली है नई रैली?

सरकार के एक फैसले से झूमे Sugar Stocks क्या Ethanol Theme में शुरू होने वाली है नई रैली

Sugar Stocks Rally: सरकार की Ethanol Policy से क्यों उछले शुगर शेयर, क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी? शेयर बाजार में कई बार एक सरकारी फैसला पूरे सेक्टर की दिशा बदल देता है। गुरुवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब शुगर कंपनियों के शेयरों में अचानक खरीदारी बढ़ गई। कुछ शेयर 5% तक उछल गए और निवेशकों की नजर एक बार फिर चीनी कंपनियों पर टिक गई।

इस तेजी के पीछे वजह सिर्फ शुगर की कीमतें नहीं हैं। असली कहानी इथेनॉल से जुड़ी है। सरकार ने E22 से E30 तक के ज्यादा इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में छूट देने का फैसला किया है। बाजार इसे शुगर और इथेनॉल सेक्टर के लिए बड़ा सकारात्मक कदम मान रहा है।

आखिर सरकार के फैसले में ऐसा क्या खास है?

भारत पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसका मकसद कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देना है।

अब सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे हाई-इथेनॉल ब्लेंड वाले ईंधन को एक्साइज ड्यूटी से राहत दी है। इसका मतलब है कि भविष्य में ज्यादा इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा मिल सकता है।

बाजार का मानना है कि अगर इथेनॉल की मांग बढ़ती है तो उसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जो चीनी के साथ-साथ इथेनॉल उत्पादन में भी सक्रिय हैं।

कौन-कौन से शेयर बने निवेशकों की पसंद?

सरकारी फैसले के बाद कई शुगर शेयरों में तेजी देखने को मिली।

धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स और SBEC Sugar में सबसे ज्यादा उत्साह दिखाई दिया। इसके अलावा द्वारिकेश शुगर, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शुगर मिल्स, बलरामपुर चीनी मिल्स और डालमिया भारत शुगर जैसे शेयर भी निवेशकों की खरीदारी का केंद्र बने।

हालांकि बाजार की नजर सिर्फ एक दिन की तेजी पर नहीं बल्कि इस बात पर है कि इथेनॉल थीम आने वाले वर्षों में कितनी बड़ी बन सकती है।

क्यों बढ़ रही है Ethanol की अहमियत?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में सरकार लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन स्रोतों पर जोर दे रही है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम इसी रणनीति का हिस्सा है। जितना ज्यादा इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाएगा, उतनी कम विदेशी तेल पर निर्भरता रहेगी।

यही वजह है कि इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली कंपनियों को निवेशक अब सिर्फ शुगर कंपनियों के रूप में नहीं बल्कि एनर्जी ट्रांजिशन स्टोरी के हिस्से के रूप में भी देखने लगे हैं।

क्या कच्चे तेल की चिंता भी एक वजह है?

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने वैकल्पिक ईंधन पर चर्चा को और तेज कर दिया है।

बाजार का मानना है कि अगर ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस बढ़ता है, तो घरेलू इथेनॉल उद्योग को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

यही कारण है कि कई निवेशक शुगर सेक्टर को सिर्फ कमोडिटी बिजनेस नहीं बल्कि भविष्य की ऊर्जा कहानी के रूप में देखने लगे हैं।

क्या Sugar Stocks में अभी और दम बाकी है?

फिलहाल शुगर शेयरों में आई तेजी का सबसे बड़ा कारण नीति समर्थन है। लेकिन आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि इथेनॉल की मांग, उत्पादन क्षमता और कंपनियों की कमाई में कितना सुधार आता है।

अगर सरकार का इथेनॉल ब्लेंडिंग रोडमैप तेज रफ्तार से आगे बढ़ता है, तो इस सेक्टर में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है।

सरकार द्वारा हाई-इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को टैक्स राहत देने के फैसले ने शुगर सेक्टर में नई ऊर्जा भर दी है। यही वजह है कि कई शुगर शेयरों में अचानक खरीदारी देखने को मिली। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह सिर्फ एक दिन की तेजी है या फिर Ethanol Theme की अगली बड़ी रैली की शुरुआत।

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(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है।)

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